आईपीसी की कौन सी धारा कब लगती है और सभी IPC धाराओं की सूची

आज के इस पोस्ट में हम Indian Penal Code ( IPC ) जरूरी जानकारी बताएंगे. यह जानकारी प्रत्येक व्यक्ति के लिए बहुत मददगार होगा, क्योंकि जानकारी हमारे और हमारे आसपास के बीच में होने वाले लड़ाई-झगड़ा अन्य घटनाएं होती रहती है. इस अन्य लड़ाई-झगड़ा की वजह से प्रशासन के द्वारा IPC की कौन सी धारा किस जुर्म में कौन सी धारा लगती है, और उसमें क्या सजा होती है इस विषय में चर्चा करेंगे.

भारतीय संविधान की वजह से भारतीय नागरिकों को एक समान अधिकार दिया गया है. इस संविधान में जो कानून के नियम है सबके लिए समान है. यह नियम किसी नागरिक के ना जात पात ना अमीर गरीब देखती है. यह नियम हर नागरिक पर लागू होती है यह कानून अपराधी के द्वारा किए गए अपराध के आधार पर कानून व्यवस्था तय करती है कि उनकी कौन सी धारा लगेगी. कानून व्यवस्था 511 धाराएं हैं जो कि प्रत्येक धाराएं अलग-अलग अपराध के लिए बनाया गया है.

IPC DHARA LIST
IPC DHARA

पुलिस की धारा कितनी होती है? IPC DHARA कितनी होती है.

भारत के प्रत्येक नागरिक को भारतीय कानून की धाराओं का जानकारी होना चाहिए जिससे छोटी मोटी गलतियों के लिए पुलिस उन पर धाराएं लगा है तो उनसे अपने हक की बात रखने में कोई हिचकिचाहट ना हो.भारत में होने वाले अपराधों को परिभाषित करने के लिए Indian Penal Code ( IPC ) भारतीय दंड संहिता में कुल 511 धाराएं हैं, जिन्हें 23 चैप्टर के तहत परिभाषित किया गया है.

कौनसी धारा कब लगती है?

  • IPC 1 – संहिता का नाम और उसके प्रवर्तन का विस्तार
  • IPC 2 – भारत के भीतर किए गए अपराधों का दण्ड।
  • IPC 3 – भारत से परे किए गए किन्तु उसके भीतर विधि के अनुसार विचारणीय अपराधों का दण्ड।
  • IPC 4 – राज्यक्षेत्रातीत / अपर देशीय अपराधों पर संहिता का विस्तार।
  • IPC 5 – कुछ विधियों पर इस अधिनियम द्वारा प्रभाव न डाला जाना।
  • IPC 6 – संहिता में की परिभाषाओं का अपवादों के अध्यधीन समझा जाना।
  • IPC 7 – एक बार स्पष्टीकॄत वाक्यांश का अभिप्राय।
  • IPC 8 – लिंग
  • IPC 9 – वचन
  • IPC 10 – पुरुष। स्त्री।
  • IPC 11 – व्यक्ति
  • IPC 12 – जनता / जन सामान्य
  • IPC 13 – क्वीन की परिभाषा
  • IPC 14 – सरकार का सेवक।
  • IPC 15 – ब्रिटिश इण्डिया की परिभाषा
  • IPC 16 – गवर्नमेंट आफ इण्डिया की परिभाषा
  • IPC 17 – सरकार।
  • IPC 18 – भारत
  • IPC 19 – न्यायाधीश।
  • IPC 20 – न्यायालय
  • IPC 21 – लोक सेवक
  • IPC 22 – चल सम्पत्ति।
  • IPC 23 – सदोष अभिलाभ / हानि।
  • IPC 24 – बेईमानी करना।
  • IPC 25 – कपटपूर्वक
  • IPC 26 – विश्वास करने का कारण।
  • IPC 27 – पत्नी, लिपिक या सेवक के कब्जे में सम्पत्ति।
  • IPC 28 – कूटकरण।
  • IPC 29 – दस्तावेज।
  • IPC 30 – मूल्यवान प्रतिभूति।
  • IPC 31 – बिल
  • IPC 32 – कार्यों को दर्शाने वाले शब्दों के अन्तर्गत अवैध लोप शामिल है।
  • IPC 33 – कार्य
  • IPC 34 – सामान्य आशय को अग्रसर करने में कई व्यक्तियों द्वारा किए गए कार्य
  • IPC 35 – जबकि ऐसा कार्य इस कारण आपराधिक है कि वह आपराधिक ज्ञान या आशय से किया गया है
  • IPC 36 – अंशत: कार्य द्वारा और अंशत: लोप द्वारा कारित परिणाम।
  • IPC 37 – कई कार्यों में से किसी एक कार्य को करके अपराध गठित करने में सहयोग करना।
  • IPC 38 – आपराधिक कार्य में संपॄक्त व्यक्ति विभिन्न अपराधों के दोषी हो सकेंगे
  • IPC 39 – स्वेच्छया।
  • IPC 40 – अपराध।
  • IPC 41 – विशेष विधि।
  • IPC 42 – स्थानीय विधि
  • IPC 43 – अवैध
  • IPC 44 – क्षति
  • IPC 45 – जीवन
  • IPC 46 – मॄत्यु
  • IPC 47 – जीवजन्तु
  • IPC 48 – जलयान
  • IPC 49 – वर्ष या मास
  • IPC 50 – धारा
  • IPC 51 – शपथ।
  • IPC 52 – सद्भावपूर्वक।
  • IPC 53 – दण्ड।
  • IPC 54 – मॄत्यु दण्डादेश का रूपांतरण।
  • IPC 55 – आजीवन कारावास के दण्डादेश का लघुकरण
  • IPC 56 – य़ूरोपियों तथा अमरीकियों को दण्ड दासता की सजा।
  • IPC 57 – दण्डावधियों की भिन्नें
  • IPC 58 – निर्वासन से दण्डादिष्ट अपराधियों के साथ कैसा व्यवहार किया जाए जब तक वे निर्वासित न कर दिए जाएं
  • IPC 59 – कारावास के बदले निर्वासनट
  • IPC 60 – दण्डादिष्ट कारावास के कतिपय मामलों में सम्पूर्ण कारावास या उसका कोई भाग कठिन या सादा हो सकेगा।
  • IPC 61 – सम्पत्ति के समपहरण का दण्डादेश।
  • IPC 62 – मॄत्यु, निर्वासन या कारावास से दण्डनीय अपराधियों की बाबत सम्पत्ति का समपहरण।
  • IPC 63 – आर्थिक दण्ड/जुर्माने की रकम।
  • IPC 64 – जुर्माना न देने पर कारावास का दण्डादेश
  • IPC 65 – जब कि कारावास और जुर्माना दोनों आदिष्ट किए जा सकते हैं, तब जुर्माना न देने पर कारावास की अवधि
  • IPC 66 – जुर्माना न देने पर किस भांति का कारावास दिया जाए।
  • IPC 67 – जुर्माना न देने पर कारावास, जबकि अपराध केवल जुर्माने से दण्डनीय हो।
  • IPC 68 – जुर्माना देने पर कारावास का पर्यवसान हो जाना।
  • IPC 69 – जुर्माने के आनुपातिक भाग के दे दिए जाने की दशा में कारावास का पर्यवसान।
  • IPC 70 – जुर्माने का छह वर्ष के भीतर या कारावास के दौरान में उद्ग्रहणीय होना । सम्पत्ति को दायित्व से मॄत्यु उन्मुक्त नहीं करती
  • IPC 71 – कई अपराधों से मिलकर बने अपराध के लिए दण्ड की अवधि
  • IPC 72 – कई अपराधों में से एक के दोषी व्यक्ति के लिए दण्ड जबकि निर्णय में यह कथित है कि यह संदेह है कि वह किस अपराध का दोषी है
  • IPC 73 – एकांत परिरोध
  • IPC 74 – एकांत परिरोध की अवधि
  • IPC 75 – पूर्व दोषसिद्धि के पश्चात् अध्याय
  • IPC 76 – विधि द्वारा आबद्ध या तथ्य की भूल के कारण अपने आप के विधि द्वारा आबद्ध होने का विश्वास करने वाले व्यक्ति द्वारा किया गया कार्य
  • IPC 77 – न्यायिकतः कार्य करते हुए न्यायाधीश का कार्य
  • IPC 78 – न्यायलय के निर्णय या आदेश के अनुसरण में किया गया कार्य
  • IPC 79 – विधि द्वारा न्यायानुमत या तथ्य की भूल से अपने को विधि द्वारा न्यायानुमत होने का विश्वास करने वाले व्यक्ति द्वारा किया गया कार्य
  • IPC 80 – विधिपूर्ण कार्य करने में दुर्घटना
  • IPC 81 – कार्य, जिससे अपहानि कारित होना संभाव्य है, किंतु जो आपराधिक आशय के बिना और अन्य अपहानि के निवारण के लिए किया गया है
  • IPC 82 – सात वर्ष से कम आयु के शिशु का कार्य
  • IPC 83 – सात वर्ष से ऊपर किंतु बारह वर्ष से कम आयु के अपरिपक्व समझ के शिशु का कार्य
  • IPC 84 – विकॄतचित व्यक्ति का कार्य
  • IPC 85 – ऐसे व्यक्ति का कार्य जो अपनी इच्छा के विरुद्ध मत्ता में होने के कारण निर्णय पर पहुंचने में असमर्थ है
  • IPC 86 – किसी व्यक्ति द्वारा, जो मत्ता में है, किया गया अपराध जिसमें विशेष आशय या ज्ञान का होना अपेक्षित है
  • IPC 87 – सम्मति से किया गया कार्य जिससे मृत्यु या घोर उपहति कारित करने का आशय न हो और न उसकी संभाव्यता का ज्ञान हो
  • IPC 88 – किसी व्यक्ति के फायदे के लिए सम्मति से सद्भावपूर्वक किया गया कार्य जिससे मृत्यु कारित करने का आशय नहीं है
  • IPC 89 – संरक्षक द्वारा या उसकी सम्मति से शिशु या उन्मत्त व्यक्ति के फायदे के लिए सद्भावपूर्वक किया गया कार्य
  • IPC 90 – सम्मति, जिसके संबंध में यह ज्ञात हो कि वह भय या भ्रम के अधीन दी गई है
  • IPC 91 – ऐसे कार्यों का अपर्वजन जो कारित अपहानि के बिना भी स्वतः अपराध है
  • IPC 92 – सम्मति के बिना किसी व्यक्ति के फायदे के लिए सद्भावपूर्वक किया गया कार्य
  • IPC 93 – सद्भावपूरवक दी गई संसूचना
  • IPC 94 – वह कार्य जिसको करने के लिए कोई व्यक्ति धमकियों द्वारा विवश किया गया है
  • IPC 95 – तुच्छ अपहानि कारित करने वाला कार्य
  • IPC 96 – प्राइवेट प्रतिरक्षा में की गई बातें
  • IPC 97 – शरीर तथा संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार
  • IPC 98 – ऐसे व्यक्ति के कार्य के विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार जो विकॄतचित्त आदि हो
  • IPC 99 – कार्य, जिनके विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का कोई अधिकार नहीं है
  • IPC 100 – शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार मृत्यु कारित करने पर कब होता है
  • IPC 101 – कब ऐसे अधिकार का विस्तार मृत्यु से भिन्न कोई अपहानि कारित करने तक का होता है
  • IPC 102 – शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रारंभ और बना रहना
  • IPC 103 – कब संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार मृत्यु कारित करने तक का होता है
  • IPC 104 – ऐसे अधिकार का विस्तार मृत्यु से भिन्न कोई अपहानि कारित करने तक का कब होता है
  • IPC 105 – संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रारंभ और बना रहना
  • IPC 106 – घातक हमले के विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार जब कि निर्दोष व्यक्ति को अपहानि होने की जोखिम है
  • IPC 107 – किसी बात का दुष्प्रेरण
  • IPC 108 – दुष्प्रेरक
  • IPC 108A – भारत से बाहर के अपराधों का भारत में दुष्प्रेरण
  • IPC 109 – दुष्प्रेरण का दण्ड, यदि दुष्प्रेरित कार्य उसके परिणामस्वरूप किया जाए, और जहां कि उसके दण्ड के लिए कोई अभिव्यक्त उपबन्ध नहीं है
  • IPC 110 – दुष्प्रेरण का दण्ड, यदि दुष्प्रेरित व्यक्ति दुष्प्रेरक के आशय से भिन्न आशय से कार्य करता है
  • IPC 111 – दुष्प्रेरक का दायित्व जब एक कार्य का दुष्प्रेरण किया गया है और उससे भिन्न कार्य किया गया है
  • IPC 112 – दुष्प्रेरक कब दुष्प्रेरित कार्य के लिए और किए गए कार्य के लिए आकलित दण्ड से दण्डनीय है
  • IPC 113 – दुष्प्रेरित कार्य से कारित उस प्रभाव के लिए दुष्प्रेरक का दायित्व जो दुष्प्रेरक द्वारा आशयित से भिन्न हो
  • IPC 114 – अपराध किए जाते समय दुष्प्रेरक की उपस्थिति
  • IPC 115 – मॄत्यु या आजीवन कारावास से दण्डनीय अपराध का दुष्प्रेरण–यदि अपराध नहीं किया जाता है
  • IPC 116 – कारावास से दण्डनीय अपराध का दुष्प्रेरण–यदि अपराध न किया जाए
  • IPC 117 – लोक साधारण द्वारा या दस से अधिक व्यक्तियों द्वारा अपराध किए जाने का दुष्प्रेरण
  • IPC 118 – मॄत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध करने की परिकल्पना को छिपाना
  • IPC 119 – किसी ऐसे अपराध के किए जाने की परिकल्पना का लोक सेवक द्वारा छिपाया जाना, जिसका निवारण करना उसका कर्तव्य है
  • IPC 120 – कारावास से दंडनीय अपराध करने की परिकल्पना को छिपाना
  • IPC 121 – भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध करना या युद्ध करने का प्रयत्न करना या युद्ध करने का दुष्प्रेरण करना
  • IPC 121क – धारा 121 द्वारा दंडनीय अपराधों को करने का षड््यंत्र
  • IPC 122 – भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध करने के आशय से आयुध आदि संग्रहित करना।
  • IPC 123 – युद्ध करने की परिकल्पना को सुगम बनाने के आशय से छिपाना
  • IPC 124 – किसी विधिपूर्ण शक्ति का प्रयोग करने के लिए विवश करने या उसका प्रयोग अवरोधित करने के आशय से राष्ट्रपति, राज्यपाल आदि पर हमला करना
  • IPC 124क – राजद्रोह
  • IPC 125 – भारत सरकार से मैत्री संबंध रखने वाली किसी एशियाई शक्ति के विरुद्ध युद्ध करना
  • IPC 126 – भारत सरकार के साथ शांति का संबंध रखने वाली शक्ति के राज्यक्षेत्र में लूटपाट करना
  • IPC 127 – धारा 125 और 126 में वर्णित युद्ध या लूटपाट द्वारा ली गई सम्पत्ति प्राप्त करना
  • IPC 128 – लोक सेवक का स्वेच्छया राजकैदी या युद्धकैदी को निकल भागने देना
  • IPC 129 – लोक सेवक का उपेक्षा से किसी कैदी का निकल भागना सहन करना
  • IPC 130 – ऐसे कैदी के निकल भागने में सहायता देना, उसे छुड़ाना या संश्रय देना
  • IPC 131 – विद्रोह का दुष्प्रेरण या किसी सैनिक, नौसेनिक या वायुसैनिक को कर्तव्य से विचलित करने का प्रयत्न करना
  • IPC 132 – विद्रोह का दुष्प्रेरण यदि उसके परिणामस्वरूप विद्रोह हो जाए
  • IPC 133 – सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा अपने वरिष्ठ अधिकारी जब कि वह अधिकारी अपने पद-निष्पादन में हो, पर हमले का दुष्प्रेरण
  • IPC 134 – हमले का दुष्प्रेरण जिसके परिणामस्वरूप हमला किया जाए
  • IPC 135 – सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा परित्याग का दुष्प्रेरण
  • IPC 136 – अभित्याजक को संश्रय देना
  • IPC 137 – मास्टर की उपेक्षा से किसी वाणिज्यिक जलयान पर छुपा हुआ अभित्याजक
  • IPC 138 – सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा अनधीनता के कार्य का दुष्प्रेरण
  • IPC 138क – पूर्वोक्त धाराओं का भारतीय सामुद्रिक सेवा को लागू होना
  • IPC 139 – कुछ अधिनियमों के अध्यधीन व्यक्ति
  • IPC 140 – सैनिक, नौसैनिक या वायुसैनिक द्वारा उपयोग में लाई जाने वाली पोशाक पहनना या प्रतीक चिह्न धारण करना
  • IPC 141 – विधिविरुद्ध जनसमूह
  • IPC 142 – विधिविरुद्ध जनसमूह का सदस्य होना
  • IPC 143 – गैरकानूनी जनसमूह का सदस्य होने के नाते दंड
  • IPC 144 – घातक आयुध से सज्जित होकर विधिविरुद्ध जनसमूह में सम्मिलित होना
  • IPC 145 – किसी विधिविरुद्ध जनसमूह जिसे बिखर जाने का समादेश दिया गया है, में जानबूझकर शामिल होना या बने रहना
  • IPC 146 – बल्वा करना
  • IPC 147 – बल्वा करने के लिए दंड
  • IPC 148 – घातक आयुध से सज्जित होकर उपद्रव करना
  • IPC 149 – विधिविरुद्ध जनसमूह का हर सदस्य, समान लक्ष्य का अभियोजन करने में किए गए अपराध का दोषी
  • IPC 150 – विधिविरुद्ध जनसमूह में सम्मिलित करने के लिए व्यक्तियों का भाड़े पर लेना या भाड़े पर लेने के लिए बढ़ावा देना
  • IPC 151 – पांच या अधिक व्यक्तियों के जनसमूह जिसे बिखर जाने का समादेश दिए जाने के पश्चात् जानबूझकर शामिल होना या बने रहना
  • IPC 152 – लोक सेवक के उपद्रव / दंगे आदि को दबाने के प्रयास में हमला करना या बाधा डालना
  • IPC 153 – उपद्रव कराने के आशय से बेहूदगी से प्रकोपित करना
  • IPC 153क – धर्म, मूलवंश, भाषा, जन्म-स्थान, निवास-स्थान, इत्यादि के आधारों पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता का संप्रवर्तन और सौहार्द्र बने रहने पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले कार्य करना।
  • IPC 153कक – किसी जुलूस में जानबूझकर आयुध ले जाने या किसी सामूहिक ड्रिल या सामूहिक प्रशिक्षण का आयध सहित संचालन या आयोजन करना या उसमें भाग लेना
  • IPC 153ख – राष्ट्रीय अखंडता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले लांछन, प्राख्यान
  • IPC 154 – उस भूमि का स्वामी या अधिवासी, जिस पर ग़ैरक़ानूनी जनसमूह एकत्रित हो
  • IPC 155 – व्यक्ति जिसके फायदे के लिए उपद्रव किया गया हो का दायित्व
  • IPC 156 – उस स्वामी या अधिवासी के अभिकर्ता का दायित्व, जिसके फायदे के लिए उपद्रव किया जाता है
  • IPC 157 – विधिविरुद्ध जनसमूह के लिए भाड़े पर लाए गए व्यक्तियों को संश्रय देना।
  • IPC 158 – विधिविरुद्ध जमाव या बल्वे में भाग लेने के लिए भाड़े पर जाना
  • IPC 159 – दंगा
  • IPC 160 – उपद्रव करने के लिए दण्ड
  • IPC 161 से 165 – लोक सेवकों द्वारा या उनसे संबंधित अपराधों के विषय में
  • IPC 166 – लोक सेवक द्वारा किसी व्यक्ति को क्षति पहुँचाने के आशय से विधि की अवज्ञा करना।
  • IPC 167 – लोक सेवक, जो क्षति कारित करने के आशय से अशुद्ध दस्तावेज रचता है।
  • IPC 168 – लोक सेवक, जो विधिविरुद्ध रूप से व्यापार में लगता है
  • IPC 169 – लोक सेवक, जो विधिविरुद्ध रूप से संपत्ति क्रय करता है या उसके लिए बोली लगाता है
  • IPC 170 – लोक सेवक का प्रतिरूपण
  • IPC 171 – कपटपूर्ण आशय से लोक सेवक के उपयोग की पोशाक पहनना या निशानी को धारण करना
  • IPC 171क – अभ्यर्थी, निर्वाचन अधिकार परिभाषित
  • IPC 171ख – रिश्वत
  • IPC 171ग – निर्वाचनों में असम्यक्् असर डालना
  • IPC 171घ – निर्वाचनों में प्रतिरूपण
  • IPC 171ङ – रिश्वत के लिए दण्ड
  • IPC 171च – निर्वाचनों में असम्यक् असर डालने या प्रतिरूपण के लिए दण्ड
  • IPC 171छ – निर्वाचन के सिलसिले में मिथ्या कथन
  • IPC 171ज – निर्वाचन के सिलसिले में अवैध संदाय
  • IPC 171झ – निर्वाचन लेखा रखने में असफलता
  • IPC 172 – समनों की तामील या अन्य कार्यवाही से बचने के लिए फरार हो जाना
  • IPC 173 – समन की तामील का या अन्य कार्यवाही का या उसके प्रकाशन का निवारण करना
  • IPC 174 – लोक सेवक का आदेश न मानकर गैर-हाजिर रहना
  • IPC 174क – लोक सेवक का आदेश न मानकर गैर-हाजिर रहना
  • IPC 175 – दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख] पेश करने के लिए वैध रूप से आबद्ध व्यक्ति का लोक सेवक को 1[दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख] पेश करने का लोप
  • IPC 176 – सूचना या इत्तिला देने के लिए कानूनी तौर पर आबद्ध व्यक्ति द्वारा लोक सेवक को सूचना या इत्तिला देने का लोप।
  • IPC 177 – झूठी सूचना देना
  • IPC 178 – शपथ या प्रतिज्ञान से इंकार करना, जबकि लोक सेवक द्वारा वह वैसा करने के लिए सम्यक् रूप से अपेक्षित किया जाए
  • IPC 179 – प्रश्न करने के लिए प्राधिकॄत लोक सेवक को उत्तर देने से इंकार करना
  • IPC 180 – कथन पर हस्ताक्षर करने से इंकार
  • IPC 181 – लोक सेवक या शपथ या प्रतिज्ञान कराने के लिए अधिकृत व्यक्ति को शपथ या प्रतिज्ञान पर मिथ्या कथन
  • IPC 182 – मिथ्या सूचना, लोक सेवक द्वारा अपनी वैध शक्ति का प्रयोग किसी अन्य व्यक्ति को चोट पहुँचाने के आशय से
  • IPC 183 – लोक सेवक के विधिपूर्ण प्राधिकार द्वारा संपत्ति लेने का विरोध
  • IPC 184 – लोक सेवक के अधिकार द्वारा बिक्री के लिए प्रस्तावित संपत्ति की बिक्री में बाधा डालना
  • IPC 185 – लोक सेवक के अधिकार द्वारा बिक्री के लिए प्रस्तावित संपत्ति के लिए अवैध खरीद या बोली
  • IPC 186 – लोक सेवक के लोक कॄत्यों के निर्वहन में बाधा डालना।
  • IPC 187 – लोक सेवक की सहायता करने का लोप, जबकि सहायता देने के लिए विधि द्वारा आबद्ध हो
  • IPC 188 – लोक सेवक द्वारा विधिवत रूप से प्रख्यापित आदेश की अवज्ञा।
  • IPC 189 – लोक सेवक को क्षति करने की धमकी
  • IPC 190 – लोक सेवक से संरक्षा के लिए आवेदन करने से रोकने हेतु किसी व्यक्ति को उत्प्रेरित करने के लिए क्षति की धमकी।
  • IPC 191 – झूठा साक्ष्य देना।
  • IPC 192 – झूठा साक्ष्य गढ़ना।
  • IPC 193 – मिथ्या साक्ष्य के लिए दंड
  • IPC 194 – मॄत्यु से दण्डनीय अपराध के लिए दोषसिद्धि कराने के आशय से झूठा साक्ष्य देना या गढ़ना।
  • IPC 195 – आजीवन कारावास या कारावास से दण्डनीय अपराध के लिए दोषसिद्धि प्राप्त करने के आशय से झूठा साक्ष्य देना या गढ़ना
  • IPC 196 – उस साक्ष्य को काम में लाना जिसका मिथ्या होना ज्ञात है
  • IPC 197 – मिथ्या प्रमाणपत्र जारी करना या हस्ताक्षरित करना
  • IPC 198 – प्रमाणपत्र जिसका नकली होना ज्ञात है, असली के रूप में प्रयोग करना।
  • IPC 199 – विधि द्वारा साक्ष्य के रूप में लिये जाने योग्य घोषणा में किया गया मिथ्या कथन।
  • IPC 200 – ऐसी घोषणा का मिथ्या होना जानते हुए सच्ची के रूप में प्रयोग करना।
  • IPC 201 – अपराध के साक्ष्य का विलोपन, या अपराधी को प्रतिच्छादित करने के लिए झूठी जानकारी देना।
  • IPC 202 – सूचना देने के लिए आबद्ध व्यक्ति द्वारा अपराध की सूचना देने का साशय लोप।
  • IPC 203 – किए गए अपराध के विषय में मिथ्या इत्तिला देना
  • IPC 204 – साक्ष्य के रूप में किसी 3[दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख] का पेश किया जाना निवारित करने के लिए उसको नष्ट करना
  • IPC 205 – वाद या अभियोजन में किसी कार्य या कार्यवाही के प्रयोजन से मिथ्या प्रतिरूपण
  • IPC 206 – संपत्ति को समपहरण किए जाने में या निष्पादन में अभिगॄहीत किए जाने से निवारित करने के लिए उसे कपटपूर्वक हटाना या छिपाना
  • IPC 207 – संपत्ति पर उसके जब्त किए जाने या निष्पादन में अभिगॄहीत किए जाने से बचाने के लिए कपटपूर्वक दावा।
  • IPC 208 – ऐसी राशि के लिए जो शोध्य न हो कपटपूर्वक डिक्री होने देना सहन करना
  • IPC 209 – बेईमानी से न्यायालय में मिथ्या दावा करना
  • IPC 210 – बकाया राशि के लिए कपटपूर्वक डिक्री प्राप्त करना
  • IPC 211 – चोट पहुंचाने के इरादे से किए गए अपराध का झूठा आरोप
  • IPC 212 – अपराधी को शरण देना
  • IPC 213 – अपराधी को सजा से बचाने के लिए उपहार आदि लेना
  • IPC 214 -स्क्रीनिंग अपराधी के विचार में उपहार की पेशकश या संपत्ति की बहाली
  • IPC 215 – चोरी की संपत्ति, आदि की वसूली में मदद करने के लिए उपहार लेना
  • IPC 216 – ऐसे अपराधी को शरण देना जो हिरासत से भाग गया हो या जिसकी गिरफ्तारी का आदेश दिया गया हो
  • IPC 216ए – लुटेरों या डकैतों को शरण देने के लिए दंड
  • IPC 216बी – धारा 212, 216 और 216ए में “बंदरगाह” की परिभाषा।
  • IPC 217 – लोक सेवक व्यक्ति को सजा या संपत्ति को जब्ती से बचाने के इरादे से कानून के निर्देश की अवहेलना करता है
  • IPC 218 – लोक सेवक व्यक्ति को सजा या संपत्ति को जब्ती से बचाने के इरादे से गलत रिकॉर्ड या लेखन तैयार करता है
  • IPC 219 – न्यायिक कार्यवाही में लोक सेवक भ्रष्ट तरीके से रिपोर्ट करना, आदि, कानून के विपरीत
  • IPC 220- अधिकार रखने वाले व्यक्ति द्वारा परीक्षण या कारावास के लिए प्रतिबद्धता जो जानता है कि वह कानून के विपरीत कार्य कर रहा है
  • IPC 221 – पकड़ने के लिए आबद्ध लोक सेवक द्वारा पकड़ने का साशय लोप
  • IPC 222 – दंडादेश के अधीन या विधिपूर्वक सुपुर्द किए गए व्यक्ति को पकड़ने के लिए आबद्ध लोक सेवक द्वारा पकड़ने का साशय लोप
  • IPC 223 – लोक सेवक द्वारा उपेक्षा से परिरोध या अभिरक्षा में से निकल भागना सहन करना।
  • IPC 224 – किसी व्यक्ति द्वारा विधि के अनुसार अपने पकड़े जाने में प्रतिरोध या बाधा।
  • IPC 225 – किसी अन्य व्यक्ति के विधि के अनुसार पकड़े जाने में प्रतिरोध या बाधा
  • IPC 225क – उन दशाओं में जिनके लिए अन्यथा उपबंध नहीं है लोक सेवक द्वारा पकड़ने का लोप या निकल भागना सहन करना
  • IPC 225ख – अन्यथा अनुपबंधित दशाओं में विधिपूर्वक पकड़ने में प्रतिरोध या बाधा या निकल भागना या छुड़ाना
  • IPC 226 – निर्वासन से विधिविरुद्ध वापसी।
  • IPC 227 – दंड के परिहार की शर्त का अतिक्रमण
  • IPC 228 – न्यायिक कार्यवाही में बैठे हुए लोक सेवक का साशय अपमान या उसके कार्य में विघ्न
  • IPC 228क – कतिपय अपराधों आदि से पीड़ित व्यक्ति की पहचान का प्रकटीकरण
  • IPC 229 – जूरी सदस्य या आंकलन कर्ता का प्रतिरूपण।
  • IPC 230 – सिक्का की परिभाषा
  • IPC 231 – सिक्के का कूटकरण
  • IPC 232 – भारतीय सिक्के का कूटकरण
  • IPC 233 – सिक्के के कूटकरण के लिए उपकरण बनाना या बेचना
  • IPC 234 – भारतीय सिक्के के कूटकरण के लिए उपकरण बनाना या बेचना
  • IPC 235 – सिक्के के कूटकरण के लिए उपकरण या सामग्री उपयोग में लाने के प्रयोजन से उसे कब्जे में रखना
  • IPC 236 – भारत से बाहर सिक्के के कूटकरण का भारत में दुष्प्रेरण
  • IPC 237 – कूटकॄत सिक्के का आयात या निर्यात
  • IPC 238 – भारतीय सिक्के की कूटकॄतियों का आयात या निर्यात
  • IPC 239 – सिक्के का परिदान जिसका कूटकॄत होना कब्जे में आने के समय ज्ञात था
  • IPC 240 – उस भारतीय सिक्के का परिदान जिसका कूटकॄत होना कब्जे में आने के समय ज्ञात था
  • IPC 241 – किसी सिक्के का असली सिक्के के रूप में परिदान, जिसका परिदान करने वाला उस समय जब वह उसके कब्जे में पहली बार आया था, कूटकॄत होना नहीं जानता था
  • IPC 242 – कूटकॄत सिक्के पर ऐसे व्यक्ति का कब्जा जो उस समय उसका कूटकॄत होना जानता था जब वह उसके कब्जे में आया था
  • IPC 243 – भारतीय सिक्के पर ऐसे व्यक्ति का कब्जा जो उसका कूटकॄत होना उस समय जानता था जब वह उसके कब्जे में आया था
  • IPC 244 – टकसाल में नियोजित व्यक्ति द्वारा सिक्के को उस वजन या मिश्रण से भिन्न कारित किया जाना जो विधि द्वारा नियत है
  • IPC 245 – टकसाल से सिक्का बनाने का उपकरण विधिविरुद्ध रूप से लेना
  • IPC 246 – कपटपूर्वक या बेईमानी से सिक्के का वजन कम करना या मिश्रण परिवर्तित करना
  • IPC 247 – कपटपूर्वक या बेईमानी से भारतीय सिक्के का वजन कम करना या मिश्रण परिवर्तित करना
  • IPC 248 – इस आशय से किसी सिक्के का रूप परिवर्तित करना कि वह भिन्न प्रकार के सिक्के के रूप में चल जाए
  • IPC 249 – इस आशय से भारतीय सिक्के का रूप परिवर्तित करना कि वह भिन्न प्रकार के सिक्के के रूप में चल जाए
  • IPC 250 – ऐसे सिक्के का परिदान जो इस ज्ञान के साथ कब्जे में आया हो कि उसे परिवर्तित किया गया है
  • IPC 251 – भारतीय सिक्के का परिदान जो इस ज्ञान के साथ कब्जे में आया हो कि उसे परिवर्तित किया गया है
  • IPC 252 – ऐसे व्यक्ति द्वारा सिक्के पर कब्जा जो उसका परिवर्तित होना उस समय जानता था जब वह उसके कब्जे में आया
  • IPC 253 – ऐसे व्यक्ति द्वारा भारतीय सिक्के पर कब्जा जो उसका परिवर्तित होना उस समय जानता था जब वह उसके कब्जे में आया
  • IPC 254 – सिक्के का असली सिक्के के रूप में परिदान जिसका परिदान करने वाला उस समय जब वह उसके कब्जे में पहली बार आया था, परिवर्तित होना नहीं जानता था
  • IPC 255 – सरकारी स्टाम्प का कूटकरण
  • IPC 256 – सरकारी स्टाम्प के कूटकरण के लिए उपकरण या सामग्री कब्जे में रखना
  • IPC 257 – सरकारी स्टाम्प के कूटकरण के लिए उपकरण बनाना या बेचना
  • IPC 258 – कूटकॄत सरकारी स्टाम्प का विक्रय
  • IPC 259 – सरकारी कूटकॄत स्टाम्प को कब्जे में रखना
  • IPC 260 – किसी सरकारी स्टाम्प को, कूटकॄत जानते हुए उसे असली स्टाम्प के रूप में उपयोग में लाना
  • IPC 261 – इस आशय से कि सरकार को हानि कारित हो, उस पदार्थ पर से, जिस पर सरकारी स्टाम्प लगा हुआ है, लेख मिटाना या दस्तावेज से वह स्टाम्प हटाना जो उसके लिए उपयोग में लाया गया है
  • IPC 262 – ऐसे सरकारी स्टाम्प का उपयोग जिसके बारे में ज्ञात है कि उसका पहले उपयोग हो चुका है
  • IPC 263 – स्टाम्प के उपयोग किए जा चुकने के द्योतक चिन्ह का छीलकर मिटाना
  • IPC 263क – बनावटी स्टाम्पों का प्रतिषेघ
  • IPC 264 – तोलने के लिए खोटे उपकरणों का कपटपूर्वक उपयोग
  • IPC 265 – खोटे बाट या माप का कपटपूर्वक उपयोग
  • IPC 266 – खोटे बाट या माप को कब्जे में रखना
  • IPC 267 – खोटे बाट या माप का बनाना या बेचना
  • IPC 268 – लोक न्यूसेन्स
  • IPC 269 – उपेक्षापूर्ण कार्य जिससे जीवन के लिए संकटपूर्ण रोग का संक्रम फैलना संभाव्य हो
  • IPC 270 – परिद्वेषपूर्ण कार्य, जिससे जीवन के लिए संकटपूर्ण रोग का संक्रम फैलना संभाव्य हो
  • IPC 271 – करन्तीन के नियम की अवज्ञा
  • IPC 272 – विक्रय के लिए आशयित खाद्य या पेय वस्तु का अपमिश्रण।
  • IPC 273 – अपायकर खाद्य या पेय का विक्रय
  • IPC 274 – औषधियों का अपमिश्रण
  • IPC 275 – अपमिश्रित ओषधियों का विक्रय
  • IPC 276 – ओषधि का भिन्न औषधि या निर्मिति के तौर पर विक्रय
  • IPC 277 – लोक जल-स्रोत या जलाशय का जल कलुषित करना
  • IPC 278 – वायुमण्डल को स्वास्थ्य के लिए अपायकर बनाना
  • IPC 279 – सार्वजनिक मार्ग पर उतावलेपन से वाहन चलाना या हांकना
  • IPC 280 – जलयान का उतावलेपन से चलाना
  • IPC 281 – भ्रामक प्रकाश, चिन्ह या बोये का प्रदर्शन
  • IPC 282 – अक्षमकर या अति लदे हुए जलयान में भाड़े के लिए जलमार्ग से किसी व्यक्ति का प्रवहण
  • IPC 283 – लोक मार्ग या पथ-प्रदर्शन मार्ग में संकट या बाधा कारित करना।
  • IPC 284 – विषैले पदार्थ के संबंध में उपेक्षापूर्ण आचरण
  • IPC 285 – अग्नि या ज्वलनशील पदार्थ के सम्बन्ध में उपेक्षापूर्ण आचरण।
  • IPC 286 – विस्फोटक पदार्थ के बारे में उपेक्षापूर्ण आचरण
  • IPC 287 – मशीनरी के सम्बन्ध में उपेक्षापूर्ण आचरण
  • IPC 288 – किसी निर्माण को गिराने या उसकी मरम्मत करने के संबंध में उपेक्षापूर्ण आचरण
  • IPC 289 – जीवजन्तु के संबंध में उपेक्षापूर्ण आचरण।
  • IPC 290 – अन्यथा अनुपबन्धित मामलों में लोक बाधा के लिए दण्ड।
  • IPC 291 – न्यूसेन्स बन्द करने के व्यादेश के पश्चात् उसका चालू रखना
  • IPC 292 – अश्लील पुस्तकों आदि का विक्रय आदि।
  • IPC 292क – विमर्शित और विद्वेषपूर्ण कार्य जो किसी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आशय से किए गए हों
  • IPC 293 – तरुण व्यक्ति को अश्लील वस्तुओ का विक्रय आदि
  • IPC 294 – अश्लील कार्य और गाने
  • IPC 294क – लाटरी कार्यालय रखना
  • IPC 295 – किसी वर्ग के धर्म का अपमान करने के आशय से उपासना के स्थान को क्षति करना या अपवित्र करना।
  • IPC 296 – धार्मिक जमाव में विघ्न करना
  • IPC 297 – कब्रिस्तानों आदि में अतिचार करना
  • IPC 298 – धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के सविचार आशय से शब्द उच्चारित करना आदि।
  • IPC 299 – आपराधिक मानव वध
  • IPC 300 – हत्या
  • IPC 301 – जिस व्यक्ति की मॄत्यु कारित करने का आशय था उससे भिन्न व्यक्ति की मॄत्यु करके आपराधिक मानव वध करना।
  • IPC 302 – हत्या के लिए दण्ड
  • IPC 303 – आजीवन कारावास से दण्डित व्यक्ति द्वारा हत्या के लिए दण्ड।
  • IPC 304 – हत्या की श्रेणी में न आने वाली गैर इरादतन हत्या के लिए दण्ड
  • IPC 304क – उपेक्षा द्वारा मॄत्यु कारित करना
  • IPC 304ख – दहेज मॄत्यु
  • IPC 305 – शिशु या उन्मत्त व्यक्ति की आत्महत्या का दुष्प्रेरण।
  • IPC 306 – आत्महत्या का दुष्प्रेरण
  • IPC 307 – हत्या करने का प्रयत्न
  • IPC 308 – गैर इरादतन हत्या करने का प्रयास
  • IPC 309 – आत्महत्या करने का प्रयत्न।
  • IPC 310 – ठग।
  • IPC 311 – ठगी के लिए दण्ड।
  • IPC 312 – गर्भपात कारित करना।
  • IPC 313 – स्त्री की सहमति के बिना गर्भपात कारित करना।
  • IPC 314 – गर्भपात कारित करने के आशय से किए गए कार्यों द्वारा कारित मॄत्यु।
  • IPC 315 – शिशु का जीवित पैदा होना रोकने या जन्म के पश्चात् उसकी मॄत्यु कारित करने के आशय से किया गया कार्य।
  • IPC 316 – ऐसे कार्य द्वारा जो गैर-इरादतन हत्या की कोटि में आता है, किसी सजीव अजात शिशु की मॄत्यु कारित करना।
  • IPC 317 – शिशु के पिता या माता या उसकी देखरेख रखने वाले व्यक्ति द्वारा बारह वर्ष से कम आयु के शिशु का परित्याग और अरक्षित डाल दिया जाना।
  • IPC 318 – मॄत शरीर के गुप्त व्ययन द्वारा जन्म छिपाना
  • IPC 319 – क्षति पहुँचाना।
  • IPC 320 – घोर आघात।
  • IPC 321 – स्वेच्छया उपहति कारित करना
  • IPC 322 – स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
  • IPC 323 – जानबूझ कर स्वेच्छा से किसी को चोट पहुँचाने के लिए दण्ड
  • IPC 324 – खतरनाक आयुधों या साधनों द्वारा स्वेच्छया उपहति कारित करना
  • IPC 325 – स्वेच्छापूर्वक किसी को गंभीर चोट पहुचाने के लिए दण्ड
  • IPC 326 – खतरनाक आयुधों या साधनों द्वारा स्वेच्छापूर्वक घोर उपहति कारित करना
  • IPC 326क – एसिड हमले
  • IPC 326ख – एसिड हमला करने का प्रयास
  • IPC 327 – संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति की जबरन वसूली करने के लिए या अवैध कार्य कराने को मजबूर करने के लिए स्वेच्छापूर्वक चोट पहुँचाना।
  • IPC 328 – अपराध करने के आशय से विष इत्यादि द्वारा क्षति कारित करना।
  • IPC 329 – सम्पत्ति उद्दापित करने के लिए या अवैध कार्य कराने को मजबूर करने के लिए स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
  • IPC 330 – संस्वीकॄति जबरन वसूली करने या विवश करके संपत्ति का प्रत्यावर्तन कराने के लिए स्वेच्छया क्षति कारित करना।
  • IPC 331 – संस्वीकॄति उद्दापित करने के लिए या विवश करके सम्पत्ति का प्रत्यावर्तन कराने के लिए स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
  • IPC 332 – लोक सेवक अपने कर्तव्य से भयोपरत करने के लिए स्वेच्छा से चोट पहुँचाना
  • IPC 333 – लोक सेवक को अपने कर्तव्यों से भयोपरत करने के लिए स्वेच्छया घोर क्षति कारित करना।
  • IPC 334 – प्रकोपन पर स्वेच्छया क्षति करना
  • IPC 335 – प्रकोपन पर स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
  • IPC 336 – दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को ख़तरा पहुँचाने वाला कार्य।
  • IPC 337 – किसी कार्य द्वारा, जिससे मानव जीवन या किसी की व्यक्तिगत सुरक्षा को ख़तरा हो, चोट पहुँचाना कारित करना
  • IPC 338 – किसी कार्य द्वारा, जिससे मानव जीवन या किसी की व्यक्तिगत सुरक्षा को ख़तरा हो, गंभीर चोट पहुँचाना कारित करना
  • IPC 339 – सदोष अवरोध।
  • IPC 340 – सदोष परिरोध या गलत तरीके से प्रतिबंधित करना।
  • IPC 341 – सदोष अवरोध के लिए दण्ड
  • IPC 342 – ग़लत तरीके से प्रतिबंधित करने के लिए दण्ड।
  • IPC 343 – तीन या अधिक दिनों के लिए सदोष परिरोध।
  • IPC 344 – दस या अधिक दिनों के लिए सदोष परिरोध।
  • IPC 345 – ऐसे व्यक्ति का सदोष परिरोध जिसके छोड़ने के लिए रिट निकल चुका है
  • IPC 346 – गुप्त स्थान में सदोष परिरोध।
  • IPC 347 – सम्पत्ति की जबरन वसूली करने के लिए या अवैध कार्य करने के लिए मजबूर करने के लिए सदोष परिरोध।
  • IPC 348 – संस्वीकॄति उद्दापित करने के लिए या विवश करके सम्पत्ति का प्रत्यावर्तन करने के लिए सदोष परिरोध
  • IPC 349 – बल।
  • IPC 350 – आपराधिक बल
  • IPC 351 – हमला।
  • IPC 352 – गम्भीर प्रकोपन के बिना हमला करने या आपराधिक बल का प्रयोग करने के लिए दण्ड
  • IPC 353 – लोक सेवक को अपने कर्तव्य के निर्वहन से भयोपरत करने के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
  • IPC 354 – स्त्री की लज्जा भंग करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
  • IPC 354क – यौन उत्पीड़न
  • IPC 354ख – एक औरत नंगा करने के इरादे के साथ कार्य
  • IPC 354ग – छिप कर देखना
  • IPC 354घ – पीछा
  • IPC 355 – गम्भीर प्रकोपन होने से अन्यथा किसी व्यक्ति का अनादर करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
  • IPC 356 – हमला या आपराधिक बल प्रयोग द्वारा किसी व्यक्ति द्वारा ले जाई जाने वाली संपत्ति की चोरी का प्रयास।
  • IPC 357 – किसी व्यक्ति का सदोष परिरोध करने के प्रयत्नों में हमला या आपराधिक बल का प्रयोग।
  • IPC 358 – गम्भीर प्रकोपन मिलने पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग
  • IPC 359 – व्यपहरण
  • IPC 360 – भारत में से व्यपहरण।
  • IPC 361 – विधिपूर्ण संरक्षकता में से व्यपहरण
  • IPC 362 – अपहरण।
  • IPC 363 – व्यपहरण के लिए दण्ड
  • IPC 363क – भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए अप्राप्तवय का व्यपहरण का विकलांगीकरण
  • IPC 364 – हत्या करने के लिए व्यपहरण या अपहरण करना।
  • IPC 364क – फिरौती, आदि के लिए व्यपहरण।
  • IPC 365 – किसी व्यक्ति का गुप्त और अनुचित रूप से सीमित / क़ैद करने के आशय से व्यपहरण या अपहरण।
  • IPC 366 – विवाह आदि के करने को विवश करने के लिए किसी स्त्री को व्यपहृत करना, अपहृत करना या उत्प्रेरित करना
  • IPC 366क – अप्राप्तवय लड़की का उपापन
  • IPC 366ख – विदेश से लड़की का आयात करना
  • IPC 367 – व्यक्ति को घोर उपहति, दासत्व, आदि का विषय बनाने के उद्देश्य से व्यपहरण या अपहरण।
  • IPC 368 – व्यपहृत या अपहृत व्यक्ति को गलत तरीके से छिपाना या क़ैद करना।
  • IPC 369 – दस वर्ष से कम आयु के शिशु के शरीर पर से चोरी करने के आशय से उसका व्यपहरण या अपहरण
  • IPC 370 – मानव तस्करी – दास के रूप में किसी व्यक्ति को खरीदना या बेचना।
  • IPC 371 – दासों का आभ्यासिक व्यवहार करना।
  • IPC 372 – वेश्यावॄत्ति आदि के प्रयोजन के लिए नाबालिग को बेचना।
  • IPC 373 – वेश्यावॄत्ति आदि के प्रयोजन के लिए नाबालिग को खरीदना।
  • IPC 374 – विधिविरुद्ध बलपूर्वक श्रम।
  • IPC 375 – बलात्संग
  • IPC 376 – बलात्कार के लिए दण्ड
  • IPC 376क – पॄथक् कर दिए जाने के दौरान किसी पुरुष द्वारा अपनी पत्नी के साथ संभोग्र
  • IPC 376ख – लोक सेवक द्वारा अपनी अभिरक्षा में की किसी स्त्री के साथ संभोग
  • IPC 376ग – जेल, प्रतिप्रेषण गॄह आदि के अधीक्षक द्वारा संभोग
  • IPC 376घ – अस्पताल के प्रबन्ध या कर्मचारिवॄन्द आदि के किसी सदस्य द्वारा उस अस्पताल में किसी स्त्री के साथ संभोग
  • IPC 377 – प्रकॄति विरुद्ध अपराध
  • IPC 378 – चोरी
  • IPC 379 – चोरी के लिए दंड
  • IPC 380 – निवास-गॄह आदि में चोरी
  • IPC 381 – लिपिक या सेवक द्वारा स्वामी के कब्जे में संपत्ति की चोरी।
  • IPC 382 – चोरी करने के लिए मॄत्यु, क्षति या अवरोध कारित करने की तैयारी के पश्चात् चोरी करना।
  • IPC 383 – उद्दापन / जबरन वसूली
  • IPC 384 – ज़बरदस्ती वसूली करने के लिए दण्ड।
  • IPC 385 – ज़बरदस्ती वसूली के लिए किसी व्यक्ति को क्षति के भय में डालना।
  • IPC 386 – किसी व्यक्ति को मॄत्यु या गंभीर आघात के भय में डालकर ज़बरदस्ती वसूली करना।
  • IPC 387 – ज़बरदस्ती वसूली करने के लिए किसी व्यक्ति को मॄत्यु या घोर आघात के भय में डालना।
  • IPC 388 – मॄत्यु या आजीवन कारावास, आदि से दंडनीय अपराध का अभियोग लगाने की धमकी देकर उद्दापन
  • IPC 389 – जबरन वसूली करने के लिए किसी व्यक्ति को अपराध का आरोप लगाने के भय में डालना।
  • IPC 390 – लूट।
  • IPC 391 – डकैती
  • IPC 392 – लूट के लिए दण्ड
  • IPC 393 – लूट करने का प्रयत्न।
  • IPC 394 – लूट करने में स्वेच्छापूर्वक किसी को चोट पहुँचाना
  • IPC 395 – डकैती के लिए दण्ड
  • IPC 396 – हत्या सहित डकैती।
  • IPC 397 – मॄत्यु या घोर आघात कारित करने के प्रयत्न के साथ लूट या डकैती।
  • IPC 398 – घातक आयुध से सज्जित होकर लूट या डकैती करने का प्रयत्न।
  • IPC 399 – डकैती करने के लिए तैयारी करना।
  • IPC 400 – डाकुओं की टोली का होने के लिए दण्ड
  • IPC 401 – चोरों के गिरोह का होने के लिए दण्ड।
  • IPC 402 – डकैती करने के प्रयोजन से एकत्रित होना।
  • IPC 403 – सम्पत्ति का बेईमानी से गबन / दुरुपयोग।
  • IPC 404 – मॄत व्यक्ति की मॄत्यु के समय उसके कब्जे में सम्पत्ति का बेईमानी से गबन / दुरुपयोग।
  • IPC 405 – आपराधिक विश्वासघात।
  • IPC 406 – विश्वास का आपराधिक हनन
  • IPC 407 – कार्यवाहक, आदि द्वारा आपराधिक विश्वासघात।
  • IPC 408 – लिपिक या सेवक द्वारा विश्वास का आपराधिक हनन
  • IPC 409 – लोक सेवक या बैंक कर्मचारी, व्यापारी या अभिकर्ता द्वारा विश्वास का आपराधिक हनन
  • IPC 410 – चुराई हुई संपत्ति
  • IPC 411 – चुराई हुई संपत्ति को बेईमानी से प्राप्त करना
  • IPC 412 – ऐसी संपत्ति को बेईमानी से प्राप्त करना जो डकैती करने में चुराई गई है।
  • IPC 413 – चुराई हुई संपत्ति का अभ्यासतः व्यापार करना।
  • IPC 414 – चुराई हुई संपत्ति छिपाने में सहायता करना।
  • IPC 415 – छल
  • IPC 416 – प्रतिरूपण द्वारा छल
  • IPC 417 – छल के लिए दण्ड।
  • IPC 418 – इस ज्ञान के साथ छल करना कि उस व्यक्ति को सदोष हानि हो सकती है जिसका हित संरक्षित रखने के लिए अपराधी आबद्ध है
  • IPC 419 – प्रतिरूपण द्वारा छल के लिए दण्ड।
  • IPC 420 – छल करना और बेईमानी से बहुमूल्य वस्तु / संपत्ति देने के लिए प्रेरित करना
  • IPC 421 – लेनदारों में वितरण निवारित करने के लिए संपत्ति का बेईमानी से या कपटपूर्वक अपसारण या छिपाना
  • IPC 422 – त्रऐंण को लेनदारों के लिए उपलब्ध होने से बेईमानी से या कपटपूर्वक निवारित करना
  • IPC 423 – अन्तरण के ऐसे विलेख का, जिसमें प्रतिफल के संबंध में मिथ्या कथन अन्तर्विष्ट है, बेईमानी से या कपटपूर्वक निष्पादन
  • IPC 424 – सम्पत्ति का बेईमानी से या कपटपूर्वक अपसारण या छिपाया जाना
  • IPC 425 – रिष्टि / कुचेष्टा।
  • IPC 426 – रिष्टि के लिए दण्ड
  • IPC 427 – कुचेष्टा जिससे पचास रुपए का नुकसान होता है
  • IPC 428 – दस रुपए के मूल्य के जीवजन्तु को वध करने या उसे विकलांग करने द्वारा रिष्टि
  • IPC 429 – किसी मूल्य के ढोर, आदि को या पचास रुपए के मूल्य के किसी जीवजन्तु का वध करने या उसे विकलांग करने आदि द्वारा कुचेष्टा।
  • IPC 430 – सिंचन संकर्म को क्षति करने या जल को दोषपूर्वक मोड़ने द्वारा रिष्टि
  • IPC 431 – लोक सड़क, पुल, नदी या जलसरणी को क्षति पहुंचाकर रिष्टि
  • IPC 432 – लोक जल निकास में नुकसानप्रद जलप्लावन या बाधा कारित करने द्वारा रिष्टि
  • IPC 433 – किसी दीपगॄह या समुद्री-चिह्न को नष्ट करके, हटाकर या कम उपयोगी बनाकर रिष्टि
  • IPC 434 – लोक प्राधिकारी द्वारा लगाए गए भूमि चिह्न के नष्ट करने या हटाने आदि द्वारा रिष्टि
  • IPC 435 – सौ रुपए का या (कॄषि उपज की दशा में) दस रुपए का नुकसान कारित करने के आशय से अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा कुचेष्टा।
  • IPC 436 – गॄह आदि को नष्ट करने के आशय से अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा कुचेष्टा।
  • IPC 437 – किसी तल्लायुक्त या बीस टन बोझ वाले जलयान को नष्ट करने या असुरक्षित बनाने के आशय से कुचेष्टा।
  • IPC 438 – धारा 437 में वर्णित अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा की गई कुचेष्टा के लिए दण्ड।
  • IPC 439 – चोरी, आदि करने के आशय से जलयान को साशय भूमि या किनारे पर चढ़ा देने के लिए दण्ड।
  • IPC 440 – मॄत्यु या उपहति कारित करने की तैयारी के पश्चात् की गई रिष्टि
  • IPC 441 – आपराधिक अतिचार।
  • IPC 442 – गॄह-अतिचार
  • IPC 443 – प्रच्छन्न गॄह-अतिचार
  • IPC 444 – रात्रौ प्रच्छन्न गॄह-अतिचार
  • IPC 445 – गॄह-भेदन।
  • IPC 446 – रात्रौ गॄह-भेदन
  • IPC 447 – आपराधिक अतिचार के लिए दण्ड।
  • IPC 448 – गॄह-अतिचार के लिए दण्ड।
  • IPC 449 – मॄत्यु से दंडनीय अपराध को रोकने के लिए गॄह-अतिचार
  • IPC 450 – अपजीवन कारावास से दंडनीय अपराध को करने के लिए गॄह-अतिचार
  • IPC 451 – कारावास से दण्डनीय अपराध को करने के लिए गॄह-अतिचार।
  • IPC 452 – बिना अनुमति घर में घुसना, चोट पहुंचाने के लिए हमले की तैयारी, हमला या गलत तरीके से दबाव बनाना
  • IPC 453 – प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन के लिए दंड
  • IPC 454 – कारावास से दण्डनीय अपराध
  • करने के लिए छिप कर गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन करना।
  • IPC 455 – उपहति, हमले या सदोष अवरोध की तैयारी के पश्चात् प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन
  • IPC 456 – रात में छिप कर गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन के लिए दण्ड।
  • IPC 457 – कारावास से दण्डनीय अपराध करने के लिए रात में छिप कर गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन करना।
  • IPC 458 – क्षति, हमला या सदोष अवरोध की तैयारी के करके रात में गॄह-अतिचार।
  • IPC 459 – प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन करते समय घोर उपहति कारित हो
  • IPC 460 – रात्रौ प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या रात्रौ गॄह-भेदन में संयुक्ततः सम्पॄक्त समस्त व्यक्ति दंडनीय हैं, जबकि उनमें से एक द्वारा मॄत्यु या घोर उपहति कारित हो
  • IPC 461 – ऐसे पात्र को, जिसमें संपत्ति है, बेईमानी से तोड़कर खोलना
  • IPC 462 – उसी अपराध के लिए दंड, जब कि वह ऐसे व्यक्ति द्वारा किया गया है जिसे अभिरक्षा न्यस्त की गई है
  • IPC 463 – कूटरचना
  • IPC 464 – मिथ्या दस्तावेज रचना
  • IPC 465 – कूटरचना के लिए दण्ड।
  • IPC 466 – न्यायालय के अभिलेख की या लोक रजिस्टर आदि की कूटरचना
  • IPC 467 – मूल्यवान प्रतिभूति, वसीयत, इत्यादि की कूटरचना
  • IPC 468 – छल के प्रयोजन से कूटरचना
  • IPC 469 – ख्याति को अपहानि पहुंचाने के आशय से कूटरचन्न
  • IPC 470 – कूटरचित 2[दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेखट
  • IPC 471 – कूटरचित दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख का असली के रूप में उपयोग में लाना
  • IPC 472 – धारा 467 के अधीन दण्डनीय कूटरचना करने के आशय से कूटकॄत मुद्रा, आदि का बनाना या कब्जे में रखना
  • IPC 473 – अन्यथा दण्डनीय कूटरचना करने के आशय से कूटकॄत मुद्रा, आदि का बनाना या कब्जे में रखना
  • IPC 474 – धारा 466 या 467 में वर्णित दस्तावेज को, उसे कूटरचित जानते हुए और उसे असली के रूप में उपयोग में लाने का आशय रखते हुए, कब्जे में रखना
  • IPC 475 – धारा 467 में वर्णित दस्तावेजों के अधिप्रमाणीकरण के लिए उपयोग में लाई जाने वाली अभिलक्षणा या चिह्न की कूटकॄति बनाना या कूटकॄत चिह्नयुक्त पदार्थ को कब्जे में रखना
  • IPC 476 – धारा 467 में वर्णित दस्तावेजों से भिन्न दस्तावेजों के अधिप्रमाणीकरण के लिए उपयोग में लाई जाने वाली अभिलक्षणा या चिह्न की कूटकॄति बनाना या कूटकॄत चिह्नयुक्त पदार्थ को कब्जे में रखना
  • IPC 477 – विल, दत्तकग्रहण प्राधिकार-पत्र या मूल्यवान प्रतिभूति को कपटपूर्वक रदद््, नष्ट, आदि करना
  • IPC 477क – लेखा का मिथ्याकरण
  • IPC 478 – व्यापार चिह्न
  • IPC 479 – सम्पत्ति-चिह्न
  • IPC 480 – मिथ्या व्यापार चिह्न का प्रयोग किया जाना
  • IPC 481 – मिथ्या सम्पत्ति-चिह्न को उपयोग में लाना
  • IPC 482 – मिथ्या सम्पत्ति-चिह्न को उपयोग करने के लिए दण्ड।
  • IPC 483 – अन्य व्यक्ति द्वारा उपयोग में लाए गए सम्पत्ति चिह्न का कूटकरण
  • IPC 484 – लोक सेवक द्वारा उपयोग में लाए गए चिह्न का कूटकरण
  • IPC 485 – सम्पत्ति-चिह्न के कूटकरण के लिए कोई उपकरण बनाना या उस पर कब्जा
  • IPC 486 – कूटकॄत सम्पत्ति-चिह्न से चिन्हित माल का विक्रय
  • IPC 487 – किसी ऐसे पात्र के ऊपर मिथ्या चिह्न बनाना जिसमें माल रखा है
  • IPC 488 – किसी ऐसे मिथ्या चिह्न को उपयोग में लाने के लिए दण्ड
  • IPC 489 – क्षति कारित करने के आशय से सम्पत्ति-चिह्न को बिगाड़ना
  • IPC 489क – करेन्सी नोटों या बैंक नोटों का कूटकरण
  • IPC 489ख – कूटरचित या कूटकॄत करेंसी नोटों या बैंक नोटों को असली के रूप में उपयोग में लाना
  • IPC 489ग – कूटरचित या कूटकॄत करेन्सी नोटों या बैंक नोटों को कब्जे में रखना
  • IPC 489घ – करेन्सी नोटों या बैंक नोटों की कूटरचना या कूटकरण के लिए उपकरण या सामग्री बनाना या कब्जे में रखना
  • IPC 489ङ – करेन्सी नोटों या बैंक नोटों से सदृश्य रखने वाली दस्तावेजों की रचना या उपयोग
  • IPC 490 – समुद्र यात्रा या यात्रा के दौरान सेवा भंग
  • IPC 491 – असहाय व्यक्ति की परिचर्या करने की और उसकी आवश्यकताओं की पूर्ति करने की संविदा का भंग
  • IPC 492 – दूर वाले स्थान पर सेवा करने का संविदा भंग जहां सेवक को मालिक के खर्चे पर ले जाया जाता है
  • IPC 493 – विधिपूर्ण विवाह का धोखे से विश्वास उत्प्रेरित करने वाले पुरुष द्वारा कारित सहवास।
  • IPC 494 – पति या पत्नी के जीवनकाल में पुनः विवाह करना
  • IPC 495 – वही अपराध पूर्ववर्ती विवाह को उस व्यक्ति से छिपाकर जिसके साथ आगामी विवाह किया जाता है।
  • IPC 496 – विधिपूर्ण विवाह के बिना कपटपूर्वक विवाह कर्म पूरा करना।
  • IPC 497 – व्यभिचार
  • IPC 498 – विवाहित स्त्री को आपराधिक आशय से फुसलाकर ले जाना, या निरुद्ध रखना
  • IPC 498A – किसी स्त्री के पति या पति के नातेदार द्वारा उसके प्रति क्रूरता करना
  • IPC 499 – मानहानि
  • IPC 500 – मानहानि के लिए दण्ड।
  • IPC 501 – मानहानिकारक जानी हुई बात को मुद्रित या उत्कीर्ण करना।
  • IPC 502 – मानहानिकारक विषय रखने वाले मुद्रित या उत्कीर्ण सामग्री का बेचना।
  • IPC 503 – आपराधिक अभित्रास।
  • IPC 504 – शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना
  • IPC 505 – लोक रिष्टिकारक वक्तव्य।
  • IPC 506 – धमकाना
  • IPC 507 – अनाम संसूचना द्वारा आपराधिक अभित्रास।
  • IPC 508 – व्यक्ति को यह विश्वास करने के लिए उत्प्रेरित करके कि वह दैवी अप्रसाद का भाजन होगा कराया गया कार्य
  • IPC 509 – शब्द, अंगविक्षेप या कार्य जो किसी स्त्री की लज्जा का अनादर करने के लिए आशयित है
  • IPC 510 – शराबी व्यक्ति द्वारा लोक स्थान में दुराचार।
  • IPC 511 – आजीवन कारावास या अन्य कारावास से दण्डनीय अपराधों को करने का प्रयत्न करने के लिए दण्ड

FAQ

कुल धारा कितनी होती है?

भारत में होने वाले अपराधों को परिभाषित करने के लिए Indian Penal Code ( IPC ) भारतीय दंड संहिता में कुल 511 धाराएं हैं, जिन्हें 23 चैप्टर के तहत परिभाषित किया गया है.

आपसी झगड़े में कौन सी धारा लगती है?

Indian Penal Code ( IPC ) भारतीय दंड संहिता के अंर्तगत लड़ाई झगड़ा या मारपीट करने के लिए धारा 294, धारा 323, एवं धारा 506 पुलिस द्वारा लगाई जाती है।

मानहानि का केस कब किया जा सकता है?

जब किसी व्यक्ति के खिलाफ कुछ ऐसा बोला यह लिखा या फिर आरोपित करना मानहानि के दायरे में आता है.

लड़कियों को परेशान करने पर कौन सी धारा लगती है?

Indian Penal Code ( IPC ) भारतीय दंड संहिता के अंर्तगत 304B के तहत लड़कियों को परेशान करने या दहेज हत्या का मामला दर्ज किया जाता है. धारा 302B के तहत किसी लड़की का शादी के 7 सालों के अंदर मौत हो जाती है. जिसके पीछे अप्राकृतिक कारण होते हैं और इस मृत्यु से पहले उस लड़की के साथ दहेज के लिए उत्पीड़न हुआ हो तो इस मौत को दहेज हत्या मान लिया जाएगा.

महिला पर हाथ उठाने पर कौन सी धारा लगती है?

महिला पर हाथ उठाने में एक से लेकर पांच वर्ष तक के कारावास और साथ ही जुर्माने का प्रावधान है. IPC संशोधन 2008 की धारा 23 (2) द्वारा इस धारा के अधीन अपराध को अशमनीय बनाया गया है.

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